Friday, 4 October 2013

I TOO HAVE A SUCCESS FORMULA FOR OTHERS.

Like all other unsuccessful peoples, I too want to leave their club and like to join the better one. So due to childhood guilty of not downloading books in mind folder, I had decided to buy some books on the subject related to success.

So I bought some books by spending all my World (in figure 10 k) with title like:-
How to become ….lionaire
Fucckess at your doorstep
Bill is not far from your gate
The crown is waiting for you.
You will be…………………………
…………………..waiting for you
…………………………………….you
(Don’t amaze  by book’s titles name. Even the real ones contains same shit)
As I am an orthodox reader or not fully recovered from the childhood trauma of school, I started searching my basic and instinctive question in the book to begin reading. i.e What is success ?
Ironically, all those authors started and ended their books with, ‘How to become successful ?’
I soon realized that this books are written for certain level intellect so I have to drop my favorite method of reading i.e starting with definition. what is what ?
So I settle to adjust with ‘How’
After eating all those books here is a combined gist for you to beware of
Be yourself ….. blah blah blah……..so believe in yourself…..adfji  dfodfudou dk ieorue ………have confident…….diec,vn loe aieureiuy qoere…….. be positive…. eoiu perepie dlkfjdji ……learn from mistake eoroee … popeei ieryyye pqpeir… always set goals…..….leader..udjfdh ieryeirie ldfjjie mnneio …. managerial qualities… market….. analyze……. realize….. teamwork………….eye on……..t…..future is (o/u)rs…..competition etc. etc. 
Thing doesn’t works. I thought to join Mr. perfectionist, Arindham chaudhuri but soon drop the idea by seeing fees of his admit card by realizing he is succeeding the successors.
After years, I have realize that success is a mere satisfaction of our journey between a span of time we talked about.
Also, I realized that neither I want to make career or to be successful but I just want to earn money to buy success at will.
Believe me, Success  is available in market with ‘for sale’ tag.
Ignorance from all these is a key to success.

राहूल तुम कहाँ हों ।

राहूल तुम कहाँ हों ।

वैसे में आपकी खुफिया राजनीति को नहीं समझता लेकिन राजनीति को तमाशा मानने वालों की जमात का होने की वजह से रिंग में दूसरा पहलवान ढूंढ रहा हूँ । पहले पहलवान तो WWF के अतिमानव की तरह हुंकार रहा है ‘ हो जाए गुजरात और दिल्ली की सल्तनत के बीच मुकाबला’ । दिग्विजय, कपिल सिब्बल, चितांबरम आदि उंगली छोड़ो । मनमोहन जी का जन बूझकर नहीं बोल रहा हूँ क्योंकि वो खुद अभी भी उंगली पकड़कर चलते हैं । इस ललकार को समझिए । यह दिल्ली की सल्तनत के लिए नहीं 10 जनपथ के लिए है । अब यह तो आपको ही लड़ना पड़ेगी । चाहे मन से चाहे अनमने ढंग से ।
अब बात चली है तो कुछ राजनीतिक सवाल ही करता चलूँ ।
आप ने तो कब से युवा युवा खेलना शुरू कर दिया था । यूथ आइकॉन । लेकिन यू पी के युवा से क्या हारे आपने तो बुजुर्गी अपना ली है । काश की आप यूथ राजनीति का कॉपी राइट करवा लेते तो हम अरविंद केजरीवाल और मोदी पर यूथ राजनीति करने की वजह से कानूनी दावा ही कर देते । वही अपनी सीबीआई के मार्फत ।
आपको और आपकी पार्टी को देखकर ऐसा लगता है की शायद उन्हे पता ही नहीं है कि चुनाओ 2014 में हैं । या फिर आप लड़ना ही नहीं चाहते । अगर नहीं लड़ना है तो साफ साफ कहो न । हम आडवाणी और मोदी का या मोदी और केजरीवाल का मुकाबला करवा लेते है । आप तो रेल कि सीट पर कपड़ा रखकर चले गए हो । राजनीतिक रीझरवेशन ।

RIGHT TO REJECT

जनाब मुख्य निर्वाचन आयुक्त जी,

उम्मीद है की आज सूप्रीम कोर्ट के ‘ RIGHT TO REJECT’ के फैसले से आप भी इसे चुनाओ सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम की तरह देख रहे होंगे । अपराधियों को संसद में जाने वाला विधेयक भी शायद अब राहुल वीटो के बाद पास पास न हो । मेरे लिए आज का दिन उस दिन से  भी ज्यादा खुशी का है जब मुझे वोट डालने का अधिकार मिला था ।
इससे पहले की राजनीतिक पार्टियां इसमे कोई टांग अड़ाये और कपिल सिब्बल, अरुण जेटली को इसमे कोई संवधानिक संकट नजर आए । बस आप तो अभी से कम पर लग जाओ जी । मशीन वशीनों में क्या चेंजेस करना है मुझे बता दो । मैं फ्री में यह काम करने को तैयार हूँ । आपकी और आप जैसे कई संवैधानिक संस्थाओं की बल्ले बल्ले इसलिए हो रही है की यह सरकार अपना नैतिक आधार खो चुकी है । लेकिन चुनाओ दूर नहीं और नई सरकार फिर से आप सब लोगों के स्क्रू टाईट कर देगी । इसलिए में तो कह रहा हूँ की बहती गंगा में आप भी अपना चुनाओ सुधारों वाली कोई लिस्ट है तो उसे मीडिया में लीक कर दो । विश्वसनीय सूत्रो के जरिये । लगे हाथ दो चार काम और हो जाएंगे ।
मैं भी रायचंद हूँ तो कुछ अपनी राय आपके सामने रख रहा हूँ । पसंद आए तो ले लेना वरना वापस कर देना ।

मोदी बने मुगल ए आज़म

मोदी को भी सभी की तरह शायद दिलीप कुमार के बीमार होने की खबर मिली होगी । दिल तड़प गया । चाहकर भी मिल नहीं सकते । कहीं मुस्लिम तुस्टिकरण का सांप ख़ुद के गले में लिपट जाए तो ? गुरु आडवाणी आगे निकल गये तो ? वैसे नमो को यह शिक्षा आडवाणी से ही मिली है । जिन्ना ने जीना हराम कर दिया । वैसे जिन्ना को लोगों के प्रधानमंत्री बनने से खास तकलीफ है । हर कहीं आड़े आ जाते हैं । खैर । तो नमो ने दिलीप साहब की याद में मुगल ए आज़म देख ली । ज्यादा कुछ तो समझ में नहीं आई, उर्दू में थी लेकिन हाँ, कुछ उर्दू के अल्फ़ाज़ जरूर कंठस्थ कर लिए । जैसे सल्तनत, शहजादा, लाल क़िला, हो जाए मुकाबला और कुछ दिलीप साहब का स्टाईल । 

आपको याद होगा मुगल ए आज़म में दिलीप साहब कहते हैं । “मेरा दिल आपका हिंदुस्तान नहीं जिस पर कोई शहंशाह हुकूमत करे । ” उफ़्फ़ । समझ सकता हूँ,  दादियों, काकियों, पड़ मोसियों का क्या हुआ होगा ।
खैर, इस डायलाग का 2013 संस्करण सुनिए,
यह देश संविधान के हिसाब से चलेगा या शहजादे के हिसाब से । 
हो जाए दिल्ली की सल्तनत और गुजरात के बीच मुकाबला । और हाँ  इन नए सम्राट की सेना हैं श्री राम सेना, स्वयं सेवक, विश्व हिन्दू परिषद और कुछ पूर्व भारतीय सैनिक और समूचा भारत । अब आप सवाल करोगे की समूचा भारत मैं कहाँ से ले आया । तो सबसे पहले आप सुन लो की आप देश द्रोही हो जो मोदी को पूरे भारत का नेता नहीं मानते और उनकी लोकप्रियता पे सवाल करतो हो ।  दूसरी बात मैंने यह आंकड़ा कहां से लिया तो पूरी BJP, RSS, रामदेव आदि लोग कह रहे हैं । इतने बड़े लोग हैं झूठ थोड़े ही बोलते होंगे । मान लो । आडवाणी, सुषमा और जेटली तो कब से मान गए । आप लोगों ही की समझ में नहीं आ रहा हैं ।
रही बात नमो से लड़ने वाले रण कुबेरों की । न ही करो तो अच्छा है । जवानी में माँझा ढीला । लगता ही नहीं है की जितना चाहते हैं या वाक ओवर चाहते हैं । गुलेल से शिकार करने निकले हैं । कुछ घिसे पीटे नारे हैं । सेकुलरिस्म, कम्मुनलिस्म, विचार धारा, गांधी परिवार आदि आदि इत्यादि इत्यादि । इन लोगों का ख़ुद इन सब बातों पर कितना यकीन है । दिख रहा हैं । लोगों को यकीन दिलाने चले हैं । क्या 10 साल की सरकार का हिसाब देने और अपने काम बताने की बजाए आप आप लोगों से यह कह सकते हैं की अब आप विपक्ष को सरकार में मत आने देना क्योंकि वो सांप्रदायिक हैं । तो जनाब आप भी तो अपने सेकुलरिस्म का रिपोर्ट कार्ड बताइये । दस साल का ही सही ।
मत बताएगा । फेल हो जाएंगे । क्या बताएगे की कैसे अजमेर बम ब्लास्ट, समझौता एक्स प्रेस आदि में दोनों समुदायों के लोगों को आपने जेल में रख रखा है । कैसे आपने मुजफ्फर नगर में सर्व दलीय दंगा किया हैं ।  कैसे और कितनों लोग जेल में बंद है । और क्यों बंद हैं ।
आप तो हाय मोदी वाय मोदी करते रहिए । अच्छा गाना है । पर हाँ ,  दिग्विजय को टाइम पर पेमेंट कर दीजिएगा । दिल लगा के काम करते हैं । मोदी के भाषण ही की तरह उसके विरोध में भी कुछ नहीं नहीं है । मोदी के विरोधीयों को भी अब लगता है कि मोदी ही के भरोसे जीत की उम्मीद है । क्या हैं इनका एक मात्र अजेंडा की मोदी नहीं आना चाहिए ।
सेकुलरवादियों तुम कुछ अपना माल भी तो बताओ । मार्केट में तो लाओ । पब्लिक ख़ुद उसकी कीमत लगाएगी ।
जेटली जी कह रहे हैं कि भारत में भी अमेरिका कि तरह दो व्यक्तियों के बीच मुकाबला होना चाहिए । और आप कह रहें कि हम व्यक्तियों आधारित राजनीति नहीं करते । विचार धारा आधारित राजनीति करते हैं ।  इंडिया इज इन्दिरा कौन सी विचार धारा थी । दरअसल जेटली आपको बीच चौराहे पर ललकार रहें है । कोई माँ का लाल हो तो आ जाए । आप तो कहते हो कि आपकी पार्टी पूरे भारत में है । लेकिन क्या पूरे भारत के लिए आपके पास कोई नेता नहीं है । 
राहुल बाबा पता नहीं आपकी रण नीतिकार कौन है ।  मेरी मानिए मैदान में कूद जाइए । ख़ुद लड़कर हारना नहीं लड़ने से ज्यादा अच्छा है । वैसे भी आप लड़े या न लड़े अगर हारे तो वो आपकी ही हार कहलायेगी । गरराईये लेकिन बेचारे मेमने पर नहीं ।  शेर से लड़िए । धहाड़िए ।  आपको पता नहीं 24/7 खबरिया चेनलों इस तमाशे के लिए ही जी रहे है । 

SHRI SHRINIVASAN: ART OF WINNING

जनाब श्रीनिवासन जी,

आपको BCCI अध्यक्ष पुनः निर्वाचित होने पर बधाई । आपका क्रिकेट में जो अतुलनीय योगदान है उससे मैं और मेरे जैसे लाखों क्रिकेट प्रेमी हमेशा आपके कृतज्ञ रहेंगे । सर जी आप तो निर्विरोध चुन लिए गए । हाँ भई । बिना किसी विरोध के । विरोध दिखाया भी तो सूप्रीम कोर्ट ने । आपके क्रिकेट के प्रति प्रेम और लगाऊ को सूप्रीम कोर्ट क्या जाने । सुना हैं आप भी अपने दामाद की वजह से परेशान हैं । क्या करें ? यह आज कल के दामाद भी न ! बस । अब मुह न खुलवाओ । वैसे ललित मोदी लंदन में बैठकर BCCI और आपके बारे में कुछ कविताये कह रहे है । अपने मिस्टर जीनियस अर्णव गोस्वामी को । उनकी बात नहीं मानना हैं न सर । झूठ बोल रहे है न मोदी । अरे में नमो की नहीं लमो के बारें में कह रहा हूँ । लगाओ बुड़बक पर राष्ट्र द्रोह का केस । लंदन में बैठकर भारत (सीसीआई) को बदनाम कर रहा है । अरुण जेटली जी से मदद ले लेना । और केस करना हो तो सुब्रमण्यम स्वामी की सेवा ले लेना । केस करने का शौक है उन्हे । शौक बड़ी चीज़ है । लेकिन सर आपका और मोदी जी के प्रेम प्रसंग से हमे BCCI की काफी सारी ज्ञान वर्धक जानकारी मिल रही है । सामान्य ज्ञान में तो बढ़ोतरी हो ही रही है । सर जी, आप और आप जैसे कई लोग जैसे की अरुण जेटली, शरद जी, डालमिया जी, ललित मोदी जी, राजीव शुक्ला जी, फारुख अब्दुल्ला जी और भी कई लोग जो की निस्वार्थ भाव से,  बिना किसी लालच के और पूरी कर्मठता से बीसीसीआई और क्रिकेट को अपना जीवन समर्पित करे हुए है । मै अपनी सेवाये आप ही तरह देने को तैयार हूँ । मुझे भी कहीं सेट कर लो सर । फीक्स कर लो जन बुझ कर नहीं बोल रहा हूँ । आपको एमबेरेसींग लगेगा ।    

Friday, 13 September 2013

लो भाई, बन गए मोदी जी प्रधानमंत्री ।

लो भाई, बन गए मोदी जी प्रधानमंत्री । प्रेसिडेंट राजनाथ ने मोदी को सरकार बनाने के लिए बुलाया है । ज्ञात रहे की कल ही सर्वोच्य निर्वाचन आयोग (आरएसएस) ने मोदी को विजय घोषित कर दिया था । सुषमा, यशवंत आदि के विभागों का बटवारा बाद में होगा और शत्रुघन, उमा आदि का निबटारा बाद में किया जाएगा ।

फेसबुकियों, ट्विटरियों, मीडिया सभी लोग अपने अपने कम पर चले जाएँ । अब मोदी का भी और दूसरों का भी पीछा छोड़ो । APCO से क़रार बाद में खत्म किया जाएगा ।

अब आप (मतलब AAP नहीं ) यह पूछेंगे की चुनाओ तो हुए नहीं फिर मोदी प्रधानमंत्री कैसे बन गए । अगर दूसरी पार्टियां कहेंगी तो चुनाओ भी करा लेंगे । वैसे, ममता, मुलायम, नितीश, लेफ्ट, उमर, नवीन आदि को राजनीतिक वनवास देने की बात चल रही है । लेकिन काँग्रेस के लिए बिल्ली के भागों वाली कहावत चरितार्थ हो गयी है ।

रही बात आडवाणी की । आडवाणी बीजेपी में खत्म नही हुए है और न ही होंगे । मोदी, आडवाणी के पूरक है । बीजेपी के लिए करो या मरो है । लिहाज़ा, बीजेपी के लिए 200+ के उम्मीदवार मोदी है और 160+ के लिए आडवाणी है । 2014 तक आडवाणी लौह को नरम करेंगे । धर्मनिरपेक्ष कहलाने की कोशिश करेंगे । मोदी, आडवाणी की नूरा कुश्ती जारी रहेगी । आरएसएस का निर्देशन अच्छा है ।

मोदी ने पहली प्रतिक्रिया में कहा है की मैं गुजराती हूँ और मैं प्रधानमंत्री हूँ । इस हिसाब से मैं गुजराती प्रधानमंत्री हूँ ।

Saturday, 7 September 2013

India, Pakistan and China's IPL

भारत v/s चीन । भारत v/s पाकिस्तान । भारत v/s चीन-पाकिस्तान । पाकिस्तान-अमेरिका v/s भारत । भारत-अमेरिका v/s चीन-पाकिस्तान । यह IPL गेम जारी है । इस गेम के क्या नियम है कोई नहीं जनता । पिच वही है, टीम वही और खिलाड़ी भी वही । यह गेम हमारे पुरुषार्थ को बल देता है । हमारी भी कोई विदेश नीति है, यह दर्शाता है । टीवी स्टुडियो को वार रूम होने का अहसास कराता है । अर्णव और उसके साथियों को भगत - सुभाष मोड में चले जाते है । भारत v/s पाकिस्तान मैच आओ युद्ध युद्ध खेलें होने लगता है । भारत v/s चीन आओ रणनीतिक और सामरिक हितों पर आधारित हो जाता है । कुछ बुद्धिजीवी और रिटायर्ड आफिसर अवतार की तरह अवतरित होते है । लाल बूझक्कड कभी मरते नहीं ।