Friday, 4 October 2013

मोदी बने मुगल ए आज़म

मोदी को भी सभी की तरह शायद दिलीप कुमार के बीमार होने की खबर मिली होगी । दिल तड़प गया । चाहकर भी मिल नहीं सकते । कहीं मुस्लिम तुस्टिकरण का सांप ख़ुद के गले में लिपट जाए तो ? गुरु आडवाणी आगे निकल गये तो ? वैसे नमो को यह शिक्षा आडवाणी से ही मिली है । जिन्ना ने जीना हराम कर दिया । वैसे जिन्ना को लोगों के प्रधानमंत्री बनने से खास तकलीफ है । हर कहीं आड़े आ जाते हैं । खैर । तो नमो ने दिलीप साहब की याद में मुगल ए आज़म देख ली । ज्यादा कुछ तो समझ में नहीं आई, उर्दू में थी लेकिन हाँ, कुछ उर्दू के अल्फ़ाज़ जरूर कंठस्थ कर लिए । जैसे सल्तनत, शहजादा, लाल क़िला, हो जाए मुकाबला और कुछ दिलीप साहब का स्टाईल । 

आपको याद होगा मुगल ए आज़म में दिलीप साहब कहते हैं । “मेरा दिल आपका हिंदुस्तान नहीं जिस पर कोई शहंशाह हुकूमत करे । ” उफ़्फ़ । समझ सकता हूँ,  दादियों, काकियों, पड़ मोसियों का क्या हुआ होगा ।
खैर, इस डायलाग का 2013 संस्करण सुनिए,
यह देश संविधान के हिसाब से चलेगा या शहजादे के हिसाब से । 
हो जाए दिल्ली की सल्तनत और गुजरात के बीच मुकाबला । और हाँ  इन नए सम्राट की सेना हैं श्री राम सेना, स्वयं सेवक, विश्व हिन्दू परिषद और कुछ पूर्व भारतीय सैनिक और समूचा भारत । अब आप सवाल करोगे की समूचा भारत मैं कहाँ से ले आया । तो सबसे पहले आप सुन लो की आप देश द्रोही हो जो मोदी को पूरे भारत का नेता नहीं मानते और उनकी लोकप्रियता पे सवाल करतो हो ।  दूसरी बात मैंने यह आंकड़ा कहां से लिया तो पूरी BJP, RSS, रामदेव आदि लोग कह रहे हैं । इतने बड़े लोग हैं झूठ थोड़े ही बोलते होंगे । मान लो । आडवाणी, सुषमा और जेटली तो कब से मान गए । आप लोगों ही की समझ में नहीं आ रहा हैं ।
रही बात नमो से लड़ने वाले रण कुबेरों की । न ही करो तो अच्छा है । जवानी में माँझा ढीला । लगता ही नहीं है की जितना चाहते हैं या वाक ओवर चाहते हैं । गुलेल से शिकार करने निकले हैं । कुछ घिसे पीटे नारे हैं । सेकुलरिस्म, कम्मुनलिस्म, विचार धारा, गांधी परिवार आदि आदि इत्यादि इत्यादि । इन लोगों का ख़ुद इन सब बातों पर कितना यकीन है । दिख रहा हैं । लोगों को यकीन दिलाने चले हैं । क्या 10 साल की सरकार का हिसाब देने और अपने काम बताने की बजाए आप आप लोगों से यह कह सकते हैं की अब आप विपक्ष को सरकार में मत आने देना क्योंकि वो सांप्रदायिक हैं । तो जनाब आप भी तो अपने सेकुलरिस्म का रिपोर्ट कार्ड बताइये । दस साल का ही सही ।
मत बताएगा । फेल हो जाएंगे । क्या बताएगे की कैसे अजमेर बम ब्लास्ट, समझौता एक्स प्रेस आदि में दोनों समुदायों के लोगों को आपने जेल में रख रखा है । कैसे आपने मुजफ्फर नगर में सर्व दलीय दंगा किया हैं ।  कैसे और कितनों लोग जेल में बंद है । और क्यों बंद हैं ।
आप तो हाय मोदी वाय मोदी करते रहिए । अच्छा गाना है । पर हाँ ,  दिग्विजय को टाइम पर पेमेंट कर दीजिएगा । दिल लगा के काम करते हैं । मोदी के भाषण ही की तरह उसके विरोध में भी कुछ नहीं नहीं है । मोदी के विरोधीयों को भी अब लगता है कि मोदी ही के भरोसे जीत की उम्मीद है । क्या हैं इनका एक मात्र अजेंडा की मोदी नहीं आना चाहिए ।
सेकुलरवादियों तुम कुछ अपना माल भी तो बताओ । मार्केट में तो लाओ । पब्लिक ख़ुद उसकी कीमत लगाएगी ।
जेटली जी कह रहे हैं कि भारत में भी अमेरिका कि तरह दो व्यक्तियों के बीच मुकाबला होना चाहिए । और आप कह रहें कि हम व्यक्तियों आधारित राजनीति नहीं करते । विचार धारा आधारित राजनीति करते हैं ।  इंडिया इज इन्दिरा कौन सी विचार धारा थी । दरअसल जेटली आपको बीच चौराहे पर ललकार रहें है । कोई माँ का लाल हो तो आ जाए । आप तो कहते हो कि आपकी पार्टी पूरे भारत में है । लेकिन क्या पूरे भारत के लिए आपके पास कोई नेता नहीं है । 
राहुल बाबा पता नहीं आपकी रण नीतिकार कौन है ।  मेरी मानिए मैदान में कूद जाइए । ख़ुद लड़कर हारना नहीं लड़ने से ज्यादा अच्छा है । वैसे भी आप लड़े या न लड़े अगर हारे तो वो आपकी ही हार कहलायेगी । गरराईये लेकिन बेचारे मेमने पर नहीं ।  शेर से लड़िए । धहाड़िए ।  आपको पता नहीं 24/7 खबरिया चेनलों इस तमाशे के लिए ही जी रहे है । 

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