राहूल तुम कहाँ हों ।
वैसे में आपकी खुफिया राजनीति को नहीं समझता लेकिन राजनीति को तमाशा मानने वालों की जमात का होने की वजह से रिंग में दूसरा पहलवान ढूंढ रहा हूँ । पहले पहलवान तो WWF के अतिमानव की तरह हुंकार रहा है ‘ हो जाए गुजरात और दिल्ली की सल्तनत के बीच मुकाबला’ । दिग्विजय, कपिल सिब्बल, चितांबरम आदि उंगली छोड़ो । मनमोहन जी का जन बूझकर नहीं बोल रहा हूँ क्योंकि वो खुद अभी भी उंगली पकड़कर चलते हैं । इस ललकार को समझिए । यह दिल्ली की सल्तनत के लिए नहीं 10 जनपथ के लिए है । अब यह तो आपको ही लड़ना पड़ेगी । चाहे मन से चाहे अनमने ढंग से ।
अब बात चली है तो कुछ राजनीतिक सवाल ही करता चलूँ ।
आप ने तो कब से युवा युवा खेलना शुरू कर दिया था । यूथ आइकॉन । लेकिन यू पी के युवा से क्या हारे आपने तो बुजुर्गी अपना ली है । काश की आप यूथ राजनीति का कॉपी राइट करवा लेते तो हम अरविंद केजरीवाल और मोदी पर यूथ राजनीति करने की वजह से कानूनी दावा ही कर देते । वही अपनी सीबीआई के मार्फत ।
आपको और आपकी पार्टी को देखकर ऐसा लगता है की शायद उन्हे पता ही नहीं है कि चुनाओ 2014 में हैं । या फिर आप लड़ना ही नहीं चाहते । अगर नहीं लड़ना है तो साफ साफ कहो न । हम आडवाणी और मोदी का या मोदी और केजरीवाल का मुकाबला करवा लेते है । आप तो रेल कि सीट पर कपड़ा रखकर चले गए हो । राजनीतिक रीझरवेशन ।
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